कोहरे के कारण ट्रेनों को क्यों रोक दिया जाता है जबकि उन्हें रास्ता देखने की कोई जरूरत तो है नहीं?

कोहरे के कारण ट्रेनों को क्यों रोक दिया जाता है जबकि उन्हें रास्ता देखने की कोई जरूरत तो है नहीं?


Tausifur Rahman
Students of class-12th and Writer


आपकी राय - सोच है कि रेल गाड़ी तो अपनी पटरी पर चलती है और प्रायः उसके लोको पायलट (इंजिन ड्राईवर) को किसी एक कार या ट्रक ड्राईवर की तरह लगातार आगे देखने की जरूरत नहीं होती, लेकिन शायद आप पूरी परिस्थिति को एक साथ देख - समझ नहीं पा रहे हैं.
वैसे देखा जाये तो हर एक लोको पायलट (इंजिन ड्राईवर) को एक कार या ट्रक ड्राईवर की तरह ही लगातार आगे देखते रहने की जरूरत होती ही है, और इंजिन ड्राईवर आगे दूर तक पटरी पर आँखें गड़ा कर देखते ही रहते हैं. अन्यथा किसी रेल फाटक पर या कहीं भी कोई भयानक दुर्घटना हो सकती है.
और अब जरा यह कल्पना भी कीजिये कि धुंध - कोहरे आदि के कारण यदि इंजिन ड्राईवर सिगनल को (खास कर रेड सिगनल यानि लाल बत्ती को) नहीं देख पाया तो फिर क्या होगा ……
ऊपर और नीचे दी गयी तस्वीरों से अन्दाज़ा लगाईये कि क्या इन गाड़ियों को ऎसी हालत में आगे जाने देना चाहिये या कुछ देर रोक कर धुन्ध छंटने की प्रतीक्षा करना ही बेहतर होगा.
आप स्टेसन मास्टर की जगह खुद को रख कर देखें.
एक अनजान शायर ने कुछ ऐसा कहा था, आप भी इस पर गौर कीजिये:
इस धुंधलके में भला कैसे सुझायी देते (यानि दिखायी देते), हम तेरे साथ न होते, तो दिखायी देते.
तस्वीरों के लिये गूगल इमेजेज को धन्यवाद

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