क्या विश्व कप फाइनल में न्यूजीलैंड के साथ नाइंसाफी हुई?

कैसे नाइंसाफी हुई? इंसान अपनी गलतियों को देखने के बजाए किस्मत और दूसरों पर ही दोष डालता है।
ICC के (बेवकूफी भरे) रूल्स तो पहले से ही तय हैं, उन्हें क्या पता था की ये फाइनल में इंग्लैंड के लिए फायदेमंद होगा, अगर यही न्यूजीलैंड के पक्ष में चला जाता तो ऐसे ही इंग्लैंड वाले रोना रो रहे होते।
आप देखो न्यूजीलैंड सेमीफइनल तक कैसे आया, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड दोनों के 11 पॉइंट्स थे, लेकिन नेट रन रेट ज़्यादा होने के कारण पाकिस्तान बाहर हो गयी, लेकिन पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड को मैच में हराया था, तब न्यूजीलैंड ने क्यों नहीं कहा की नेट रन रेट के बजाए ये देखे की दोनों में से किस टीम ने दूसरी को हराया है। (कई टूर्नामेंट्स में ऐसा होता है दो टीम के समान पॉइंट्स होने पर दूसरी टीम को हराने वाली टीम क्वालीफाई करती है)
अब बात भाग्य की, क्या न्यूज़ीलैंड को भाग्य का साथ नहीं मिला? ग्रुप स्टेज में उसका भारत के साथ मुश्किल मैच ड्रा हो गया और पॉइंट्स बंट गए, वही पाकिस्तान का श्रीलंका के साथ थोड़ा आसान मैच ड्रा हो गया, वहां पाकिस्तान जीत जाता तो उसका सेमीफइनल का चांस बनता।
उसके बाद फाइनल में आखरी के ओवर्स में मैच आपकी हाथ में था, पुरे वर्ल्डकप में अच्छी फील्डिंग करने वाली न्यूजीलैंड 2 ओवर अच्छी फील्डिंग नहीं कर पाई, ऐसा ही भारत के साथ हुआ था 3 ओवर की घटिया बैटिंग में ही वर्ल्डकप से बहार हो गए।
उसके बाद सुपर ओवर, आपको 2 बॉल में 3 रन बनाने थे, मतलब इस से ज़्यादा किस्मत और क्या दे सकती है?
माना की अंत में किस्मत ने अंग्रेज़ों का साथ दिया, लेकिन किस्मत ने न्यूजीलैंड को भी पूरा मौका दिया था, और मौके पर चौक्का मारना ही तो क्रिकेट है।
हम भारतीय तो चाह रहे थे न्यूजीलैंड जीते, लेकिन हमे इंग्लैंड की टीम, कल्चर, लोग चाहे जितने भी नपसंद हों, ये तो मानना पड़ेगा उनकी टीम उन कंडीशंस में सबसे बेहतर थी और अंत में सबसे बेहतर टीम ही जीती।

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